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VOL. 11, ISSUE 1 (2026)
ग्रामीण एवं शहरी माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता का अध्ययन
Authors
डॉ० संजीव कुमार तिवारी, शैलेंद्र कुमार पाण्डेय
Abstract
प्रस्तुत शोध कार्य का उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता का तुलनात्मक अध्ययन करना है। सृजनात्मकता आज के ज्ञान-आधारित एवं प्रतिस्पर्धात्मकयुग में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष मानी जाती है, क्योंकियह विद्यार्थियों में नवीन सोच, समस्या-समाधान क्षमता, मौलिकता, कल्पनाशीलता तथा नवाचार की प्रवृत्ति को विकसित करती है। विद्यालयी शिक्षा के स्तर पर सृजनात्मकता का विकास विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व निर्माण में भी सहायक सिद्ध होता है। ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों की शैक्षिक परिस्थितियाँ, संसाधन, शिक्षण पद्धतियाँ तथा सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण भिन्न होने के कारण विद्यार्थियों की सृजनात्मकता में भी अन्तर की सम्भावना रहती है। इसी संदर्भ में इस शोध पत्र मेंयह जानने का प्रयास किया गया है कि क्या ग्रामीण एवं शहरी माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता में कोई सार्थक अन्तर पाया जाता है।
इस अध्ययन में सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया तथा नमूने केरूप में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों का चयनयादृच्छिक विधि द्वारा किया गया। विद्यार्थियों की सृजनात्मकता के मापन हेतु मानकीकृत सृजनात्मकता परीक्षण का उपयोग किया गया। एकत्रित आँकड़ों का सांख्यिकीय विश्लेषण मध्यमान, मानक विचलन एवं ‘टी’-परीक्षण जैसी उपयुक्त सांख्यिकीय तकनीकों की सहायता से किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों सेयह स्पष्ट हुआ कि शहरी माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता का स्तर सामान्यतः ग्रामीण विद्यार्थियों की अपेक्षा अधिक पाया गया। इसका प्रमुख कारण शहरी क्षेत्र में उपलब्ध शैक्षिक संसाधन, तकनीकी सुविधाएँ, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के अवसर, शिक्षकों की विविध शिक्षण विधियाँ तथा अनुकूल बौद्धिक वातावरण माना जा सकता है। वहीं ग्रामीण विद्यार्थियों में सृजनात्मकता के विकास में संसाधनों की कमी, सीमित शैक्षिक अवसर एवं पारंपरिक शिक्षण पद्धतियाँ बाधक सिद्ध होती हैं।अध्ययन सेयह भी निष्कर्ष प्राप्त हुआ कियदि ग्रामीण विद्यालयों में नवोन्मेषी शिक्षण विधियों, परियोजना कार्य, कला एवं अभिव्यक्तिपरक गतिविधियों, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा अनुकूल शैक्षिक वातावरण को प्रोत्साहित किया जाए तो ग्रामीण विद्यार्थियों की सृजनात्मकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। इस प्रकारयह शोध पत्र शिक्षा नियोजकों, शिक्षकों एवं प्रशासकों के लिए उपयोगी सिद्ध होता है, क्योंकि इसके निष्कर्षों के आधार पर ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों में सृजनात्मकता के विकास हेतु उपयुक्त शैक्षिक कार्यक्रम एवं नीतियाँ विकसित की जा सकती हैं। अंततःयह अध्ययन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि सृजनात्मकता का विकास केवल क्षेत्र विशेष पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उपयुक्त अवसर, संसाधन एवं शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराकर प्रत्येक विद्यार्थी में सृजनात्मक क्षमता को उन्नत किया जा सकता है।
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Pages:33-36
How to cite this article:
डॉ० संजीव कुमार तिवारी, शैलेंद्र कुमार पाण्डेय "ग्रामीण एवं शहरी माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों की सृजनात्मकता का अध्ययन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 11, Issue 1, 2026, Pages 33-36
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