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VOL. 11, ISSUE 2 (2026)
भारत में चुनावी सुधारों की आवश्यकता एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
दीपक नाथ, डॉ हेमा
Abstract
चुनाव सुधार से तात्पर्य किसी देश में चुनावी प्रक्रिया की दक्षता, पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढाने के उद्देश्य से किये गए व्यवस्थित परिवर्तनों से हैं। भारत जैसे लोकतन्त्र में, चुनाव राजनीतिक वैधता और नागरिक भागीदारी की आधारशिला होते हैं। इसलिए स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव कराना लोकतांत्रिक शासन को बनाए रखने के लिए मूलभूत आवश्यकता हैं। हालांकि, समय के साथ, चुनावी प्रक्रिया को धन और बल का दुरुपयोग, राजनीति का अपराधीकरण, राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतन्त्र की कमी और मतदान में कम भागीदारी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता हैं। यह शोध यह बतायेगा की इन मुद्दों पर काबू पाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता को बनाए रखने के लिए चुनावी सुधार अनिवार्य हो गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य कानूनी ढांचे को मजबूत करना, संस्थागत तन्त्र में सुधार करना और चुनावी प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल करना हैं। भारत में चुनाव सुधार लोकतन्त्र को मजबूत करने, मतदान प्रक्रिया की अखंडता को मजबूत करने और राजनीति के अपराधीकरण, धन के अत्यधिक प्रभाव और मतदाता उदासीनता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने के लिए आवश्यक है। प्रमुख जरूरतों में फंडिंग में पारदर्शिता बढाना, अवैध धन और बाहुबल के इस्तेमाल पर अंकुश लगाना और स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रणालियों का आधुनिकीकरण करना शामिल हैं।
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Pages:48-51
How to cite this article:
दीपक नाथ, डॉ हेमा "भारत में चुनावी सुधारों की आवश्यकता एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 11, Issue 2, 2026, Pages 48-51
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