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VOL. 11, ISSUE 1 (2026)
पंचायती राजनीति और पितृसत्तात्मक सत्ता का आलोचनात्मक विवेचन: नीलाक्षी सिंह की कहानी “साया कोई” के संदर्भ में
Authors
बाबू लाल बेनीवाल, डॉ. भगवान सिंह सोलंकी
Abstract
समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में पंचायत, लोकतंत्र और स्त्री-प्रतिनिधित्व जैसे विषयों को केंद्र में रखकर अनेक रचनाएँ सामने आई हैं, किंतु उनमें बहुत कम ऐसी हैं जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर छिपी पितृसत्तात्मक संरचनाओं को इतनी सूक्ष्मता और तीव्रता से उद्घाटित करती हों, जितनी कि नीलाक्षी सिंह की कहानी “साया कोई”। यह कहानी एक ग्रामीण, निःसंतान, श्रमशील स्त्री के माध्यम से पंचायत-राजनीति की उस विडंबनात्मक संरचना को उजागर करती है, जिसमें स्त्री को सत्ता का प्रतीकात्मक चेहरा बनाकर पुरुष वर्ग वास्तविक सत्ता का उपभोग करता है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि किस प्रकार पंचायती लोकतंत्र में स्त्री आरक्षण, पितृसत्तात्मक सोच के अधीन एक ‘मुखौटा व्यवस्था’ में बदल जाता है और कैसे कहानी की नायिका अंततः इस व्यवस्था को एक मौन, किंतु निर्णायक प्रतिरोध के माध्यम से चुनौती देती है।
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Pages:37-39
How to cite this article:
बाबू लाल बेनीवाल, डॉ. भगवान सिंह सोलंकी "पंचायती राजनीति और पितृसत्तात्मक सत्ता का आलोचनात्मक विवेचन: नीलाक्षी सिंह की कहानी “साया कोई” के संदर्भ में". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 11, Issue 1, 2026, Pages 37-39
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