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VOL. 11, ISSUE 1 (2026)
तकनीकी के दौर में महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के विरुद्ध बढ़ते अपराध: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
अतुल कुमार यादव
Abstract
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने
समकालीन समाज की संरचना, व्यवहार और संबंधों को गहराई से प्रभावित किया है। इंटरनेट और डिजिटल
प्लेटफॉर्मों के माध्यम से जहाँ ज्ञान, अभिव्यक्ति और सहभागिता का दायरा व्यापक हुआ है, वहीं इसी तकनीकी विस्तार ने अपराध के ऐसे नए आयाम भी उत्पन्न किए हैं, जो अदृश्य, सीमाहीन और त्वरित प्रकृति के हैं। डिजिटल स्पेस अब केवल सुविधा और
सशक्तिकरण का माध्यम नहीं रहा, बल्कि महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए एक गंभीर सामाजिक-कानूनी चुनौती के रूप में
उभर कर सामने आया है। यह शोध तकनीकी युग में भारत में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों तथा सामाजिक
रूप से वंचित वर्गों के विरुद्ध बढ़ते अपराधों का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत
करता है। साइबर-स्टॉकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, डिजिटल मानहानि, मॉर्फिंग, पहचान-चोरी, अश्लील सामग्री का गैर-सहमति प्रसार, सेक्सटॉर्शन तथा साइबर पोर्नोग्राफी जैसे अपराध न केवल पीड़ित की निजता और
गरिमा का उल्लंघन करते हैं, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा को भी गम्भीर रूप से प्रभावित करते
हैं। अध्ययन में यह रेखांकित किया गया है कि उपलब्ध आंकड़े साइबर अपराधों की
वास्तविक स्थिति का पूर्ण प्रतिबिंब नहीं हैं, क्योंकि सामाजिक बदनामी, भय और विधिक प्रक्रिया की
जटिलताओं के कारण बड़ी संख्या में अपराध रिपोर्ट ही नहीं हो पाते। हालाँकि भारतीय
न्याय प्रणाली में औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर नई संहिताओं को लागू किया गया है, फिर भी साइबर-स्टॉकिंग, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और
डिजिटल यौन अपराधों जैसे उभरते अपराधों के लिए विशिष्ट और व्यापक प्रावधानों का
अभाव बना हुआ है।
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Pages:26-32
How to cite this article:
अतुल कुमार यादव "तकनीकी के दौर में महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के विरुद्ध बढ़ते अपराध: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 11, Issue 1, 2026, Pages 26-32
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