ARCHIVES
VOL. 10, ISSUE 4 (2025)
ग्रामीण क्षेत्रों का बहुआयामी विकास, मनरेगा के सन्दर्भ में
Authors
धीरज व्यास, डॉ. विक्रम सिंह चुण्डावत
Abstract
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), जिसे 2005 में लागू किया गया, भारत की सबसे व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आजीविका की गारंटी प्रदान करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। यह शोध-पत्र मनरेगा के क्रियान्वयन और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण करता है, विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिन का रोजगार प्रदान किया जाता है, जिससे ग्रामीण अवसंरचना का विकास, पलायन में कमी और महिला भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यद्यपि पारदर्शिता की कमी, भ्रष्टाचार, तथा वेतन भुगतान में विलंब जैसी चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं, फिर भी यह योजना गांधीजी के ग्राम स्वराज एवं आत्मनिर्भरता के विचार को साकार करने की दिशा में प्रभावी कदम है। प्रभावी शासन, तकनीकी हस्तक्षेप एवं सामुदायिक भागीदारी से इसके परिणामों को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
Download
Pages:6-9
How to cite this article:
धीरज व्यास, डॉ. विक्रम सिंह चुण्डावत "ग्रामीण क्षेत्रों का बहुआयामी विकास, मनरेगा के सन्दर्भ में". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 4, 2025, Pages 6-9
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.
