ARCHIVES
VOL. 10, ISSUE 4 (2025)
आरक्षण नीति और महिला प्रतिनिधित्वर: ग्रामीण भारत में सशक्तिकरण की यथार्थता
Authors
संदीपा, डॉ. भावना अरोड़ा
Abstract
यह अध्ययन ग्रामीण भारत में आरक्षण नीति और महिला प्रतिनिधित्व के प्रभावों का विश्लेषण करता है, जिसमें संवैधानिक प्रावधानों, वर्तमान स्थिति, चुनौतियों, प्रभावों और वास्तविक उदाहरणों का समग्र मूल्यांकन शामिल है। पिछले तीन दशकों में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33ः आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। वास्तविक अध्ययनों के साक्ष्य दर्शाते हैं कि महिला प्रतिनिधित्व ने सेवा वितरण, निर्णय-निर्माण और सामाजिक दृष्टिकोणों में सुधार किया है, साथ ही लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा एवं राजनीतिक भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाई है। इस शोध में साहित्य समीक्षा, विधिक एवं संवैधानिक ढाँचे का विश्लेषण, वर्तमान प्रतिनिधित्व की स्थिति, चुनौतियाँ एवं सीमाएँ, तथा प्रभाव एवं उदाहरण को सम्मिलित किया गया है। निष्कर्ष में यह स्पष्ट हुआ कि नीति की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए रोटेशन अवधि में लचीलापन, क्षमता निर्माण, संस्थागत समर्थन और प्रॉक्सी नेतृत्व पर रोक जैसे कदम आवश्यक हैं। यह लेख दर्शाता है कि महिला आरक्षण नीति मात्र एक संवैधानिक प्रावधान नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक संरचना में गहरे और स्थायी परिवर्तन की प्रक्रिया है, जिसे निरंतर समीक्षा और समर्थन की आवश्यकता है।
Download
Pages:1-5
How to cite this article:
संदीपा, डॉ. भावना अरोड़ा "आरक्षण नीति और महिला प्रतिनिधित्वर: ग्रामीण भारत में सशक्तिकरण की यथार्थता". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 4, 2025, Pages 1-5
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.
