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VOL. 10, ISSUE 3 (2025)
भस्त्रिका प्राणायाम का त्रिदोष संतुलन पर प्रभावरू एक आयुर्वेदिक एवं योगिक दृष्टिकोण
Authors
पूजा बिश्नोई
Abstract
प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में आयुर्वेद और योग दोनों का महत्वपूर्ण स्थान है। आयुर्वेद में मानव शरीर को त्रिदोष कृ वात, पित्त और कफ कृ के संतुलन पर आधारित माना गया है। इन दोषों के असंतुलन से विभिन्न रोग उत्पन्न होते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम एक शक्तिशाली श्वसन क्रिया है, जिसे त्रिदोषों के संतुलन हेतु अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इस शोध पत्र में भस्त्रिका प्राणायाम के माध्यम से त्रिदोषों के संतुलन पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि नियमित एवं विधिपूर्वक किया गया भस्त्रिका प्राणायाम त्रिदोषों के असंतुलन को संतुलित करने में सहायक सिद्ध होता है, जिससे व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक स्वास्थ्य सुदृढ़ होता है।
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Pages:80-81
How to cite this article:
पूजा बिश्नोई "भस्त्रिका प्राणायाम का त्रिदोष संतुलन पर प्रभावरू एक आयुर्वेदिक एवं योगिक दृष्टिकोण". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 3, 2025, Pages 80-81
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