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VOL. 10, ISSUE 2 (2025)
राजनीतिक विचारक के रूप में महात्मा गांधी का मूल्यांकन
Authors
खैरूल जहाँ, डॉ. अम्बिका बंसल
Abstract
गाँधी जी मूलतः एक राजनीतिज्ञ कम और आध्यात्मिक सन्त अधिक थे। उन्होंने राजनीति में सत्य, अहिंसा, नैतिकता और धर्म जैसे तत्वों को समाहित करने का जो प्रयास किया वह कोई सन्त ही कर सकता है, राजनीतिज्ञ नहीं। गाँधी जी के सिद्धान्तों और व्यवहार में कोई अन्तर नहीं था। ईश्वर, आत्मा, परमात्मा, नैतिकता, धर्मादि में उनकी गहरी आस्था थी। उनके लिए राजनीति धर्म तथा नैतिकता की एक शाखा थी। स्वाभाविक था कि उन्होंने राजनीति का आध्यात्मीकरण करने का समर्थन किया। यद्यपि वह समाजवाद में विश्वास करते थे, किन्तु मार्क्सवादी वर्ग संघर्ष तथा हिन्सक उपायों का विरोध करते थे। गाँधी जी अराजकतावादी विचारों से सहमत थे, लेकिन राज्य को नष्ट करने के स्थान पर वह एक अहिंसात्मक राज्य की स्थापना की वकालत करते थे। प्लेटो, एक्विनास, रूसो आदि विचारकों की भांति गांधीजी केवल कल्पना की दुनिया में विचरण करने वाले व्यक्ति नहीं थे, वरन् गांधीजी एक महान् कर्मयोगी थे, जिन्होंने भारत की स्वतन्त्रता के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी। गांधीजी के राजनीतिक विचारों को ‘गांधीवाद’ की संज्ञा दी जाती है।
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Pages:61-64
How to cite this article:
खैरूल जहाँ, डॉ. अम्बिका बंसल "राजनीतिक विचारक के रूप में महात्मा गांधी का मूल्यांकन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 2, 2025, Pages 61-64
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