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VOL. 10, ISSUE 2 (2025)
शुद्ध पर्यावरण अवश्यकतारू स्वस्थ तन और मन
Authors
डॉ. गरिमा अवस्थी
Abstract
यह लेख आज के समाज की दो प्रकार की समस्याओं के विषय में विचार करने हेतु लिखा गया है। यहां दोनो ही समस्याएँ जुड़ी तो पर्यावरण से हैं, परन्तु पर्यावरण के रूप अलग अलग हैं, जैसे तन और मन का पर्यावरण। हमारे आस पास जो प्रदूषण है, मुख्यतः हवा, पानी और मिट्टी में, वह हमारे तन के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। उसी प्रकार हमारे विचारों का प्रदूषण हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इस प्रकार का प्रदूषण नकारात्मक विचारों से और अभद्र भाषा का प्रयोग करने से उत्पन्न होता है। इस प्रकार का प्रदूषण मन मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं को उत्पन्न करता है तथा व्यक्ति की कार्य क्षमता को भी प्रभावित करता है। आवश्यकता है कि हम उन विकल्पों को तलाशें, जिससे कि हम दोनों तरह के वातावरण को शुद्ध रख सके, और परिणाम स्वरूप अपने तन के साथ मन को भी स्वस्थ बनाएं रखें।
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Pages:13-14
How to cite this article:
डॉ. गरिमा अवस्थी "शुद्ध पर्यावरण अवश्यकतारू स्वस्थ तन और मन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 2, 2025, Pages 13-14
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