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VOL. 10, ISSUE 1 (2025)
अध्यात्म और योग
Authors
डाॅ. राजेश त्रिपाठी
Abstract
अध्यात्म मानव जीवन का मूल है। अध्यात्मिक जीवन ही व्यक्ति को उन्नति प्रदान करता है तथा योग एवं अध्यात्म एक दूसरे के पूरक हैं। योग व्यक्ति में अध्यात्म की शक्ति को बढ़ाता एवं सकारात्मक बने रहने में मदद करता है। 
भारत को देव भूमि कहा जाता है। यहां पर समय समय पर देवताओं ने अवतार लेकर इस भूमि को पावन बनाया है। यहां पर राम का जन्म त्रेता युग में तथा कृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ। यहां के कण कण को शंकर की तरह पूजा जाता है। यहां पर तप, दान, कर्मकांड का प्रचलन प्राचीन काल से चला आ रहा है। भारत की इस पावन धरा पर आध्यात्म की लहर युगों युगों से बहती आ रही है। इस अध्यात्म की लहर के कारण ही इस पावन धरा पर बच्चों में संस्कार देखने को मिलते हैं जो और कहीं नहीं देखने को मिलते हैं लेकिन कुछ बच्चे स्वयं को आधुनिक दिखावे के चक्कर मे अपने धर्म से विचलित हो रहे हैं। वे अपने संस्कारों से विमुख हो रहे हैं। इसका प्रमुख कारण टीवी और मोबाईल है और रही सही कसर इन फिल्मों ने नहीं छोड़ी। आज का यह बाॅलीवुड हमेशा हिन्दु धर्म का मजाक बनाता रहा है। इसका असर बच्चों के दिलादिमाग पर पड़ रहा है। हमेशा हिन्दु देवी देवताओं का मजाक बनाते हैं और हल्केपन की सभी सीमाओं को लांघ देते हैं। इस सबका परिणाम यह भोग भी रहे हैं। ज्यादातर कलाकार कैन्सर जैसी भयंकर बीमारी का शिकार होते देखे गये हैं। इस बीमारी से ज्यादातर लोग मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इतनी सुख सुविधा होने के बावजूद यह रोग इसलिए देखा गया है क्योंकि यह अपने जीवन में यम नियम का पालन करना चाहिए वह नहीं करते हैं और रोग ग्रस्त हो जाते हैं। 
धर्म हमें सदैव सद्मार्ग दिखाता है। धर्म के कारण ही यहां पर दान, क्षमा जैसे नैतिक मूल्यों का पालन भी किया जा रहा है। सनातन धर्म का पालन न केवल आपको रोगों से बचाता है अपितु जीवन जीन की पद्धति का ज्ञान देता है।
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Pages:1-2
How to cite this article:
डाॅ. राजेश त्रिपाठी "अध्यात्म और योग". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 10, Issue 1, 2025, Pages 1-2
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