Logo
National Journal of
Multidisciplinary
Research and Development

Search

ARCHIVES
VOL. 9, ISSUE 4 (2024)
श्रीमद्भगवद्गीता में शैक्षिक व मनोवैज्ञानिक तथ्यों का समन्वय-एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
डॉ0 विभा चौहान, निधि राजौरिया
Abstract
विज्ञान और तकनीकी के इस युग में विकास के बावजूद भी मानव के जन्म लेने, बूढ़े तथा बीमार होने और अन्त में विनष्ट होने में कोई परिवर्तन नहीं आया। क्योंकि किसी भी वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास के किसी भी स्तर तक प्रगति करने पर इन सांसारिक कलेशों को दूर नहीं किया जा सकता है। जीवन के दुख और सुख की मात्रा नियति द्वारा किये गये पूर्व कर्मों के आधार पर जन्म के समय ही निर्धारित कर दी जाती है। भगवान की शरणागत हुये बिना इन कलेशों से मुक्ति नहीं मिल सकती है। यद्यपि मोबाइल, कम्प्यूटर, टीवी तथा अन्य इलैक्ट्रॉनिक उपकरण हमारे शरीर व इन्द्रियों के लिये प्रत्यक्ष रुप ले तो काफी सुखदायक हैं किन्तु फिर भी हम दुखों से बच नहीं पाते। आजकल दुखों ने तनाव, चिंता, अवसाद, हीनभावना, अस्तित्व बनाये रखने की होड़ में एक-दूसरे का गलाकाट प्रतिस्पर्धा, मानसिक रोगों का रुप धारण कर लिया है तो और भी कष्टदायक है। श्रीमöगवदगीता में इन सबका समाधान दिया गया है और यह आधुनिक समय के लिये सबसे अधिक प्रासंगिक है। यही कारण है कि भारतीयों से अधिक अमेरिकी, यूरोपियन तथा विश्व के कोने-कोने से लोग कृष्ण भावनामृत विधि की प्रशंसा कर रहे हैं। लोगों ने कृष्ण भावनाव्रत को न केवल स्वीकार किया बल्कि अपने कष्टों से राहत का अनुभव भी कर रहे है। श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य को जाति-पाति, रंग, राष्ट्रीयता भाषा, आयु सीमा, शैक्षिक योग्यता समय स्थान, परिस्थिति से ऊँचा उठाती है एवं अपने दिव्य उपदेशों से मानव मात्र का कल्याण करती है।
Download
Pages:11-14
How to cite this article:
डॉ0 विभा चौहान, निधि राजौरिया "श्रीमद्भगवद्गीता में शैक्षिक व मनोवैज्ञानिक तथ्यों का समन्वय-एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 9, Issue 4, 2024, Pages 11-14
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.