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VOL. 9, ISSUE 3 (2024)
यूनानी चिकित्सा के आधारभूत सिधांत
Authors
मोहम्मद वसीम अहमद, रीशा अहमद, सफदर हुसैन, मोहम्मद साजिद, जकी अहमद सिद्दीकी
Abstract
भारत वर्ष में प्राचीनकाल से आयुर्वेद चिकित्सा प्रचलित होने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति ने अपना परिचय देते हुए यूनानी चिकित्सा के भारत आगमन पर इस प्रणाली को विदेशी होने के उपरांत भी अपने में समाहित किया। जो की भारत की महानता, सुद्रढ़ और प्राचीन सभ्यता का भी प्रमाण है।  
यूनानी चिकित्सा पद्धति दुनिया में चिकित्सा की एक पारंपरिक और सबसे प्राचीन प्रचलित प्रणाली है। यूनानी चिकित्सा के अनुसार, मानव शरीर का स्वास्थ्य यूनानी सिद्धांत के सात बुनियादी शारीरिक सिद्धांतों, उमूर अल- तबिय्यह की सामंजस्यपूर्ण व्यवस्था द्वारा बनाए रखा जाता है। इन सिद्धांतों में (1) अरकान या तत्व (2) मिज़ाज या स्वभाव (3) अख्लात या शारीरिक दोष (4) आज़ा या अंग और प्रणालियाँ (5) अरवाह या महत्वपूर्ण आत्मा (6) क़ुवा या संकाय या शक्तियाँ और (7) अफ़ाल या कार्य शामिल हैं । यूनानी चिकित्सा में जीवित मनुष्य के लिए छह कारक आवश्यक हैं। इसमें आमतौर पर उपचार के चार मुख्य तरीकों का उपयोग किया जाता है जैसे इलाज-बिल-तदबीर (रेजिमिनल थेरेपी), इलाज-बिल-गिज़ा (डाइटो थेरेपी), इलाज-बिल-दवा (फार्माको थेरेपी) और इलाज-बिल-यद (सर्जरी)। इस पत्र में, लेखकों ने यूनानी चिकित्सा पद्धति के परिचय, सिद्धांत, निदान, रोग चिकित्साओं, अवधारणाओं और कार्यप्रणाली को शामिल करने के साथ- साथ यूनानी चिकित्सा में आने वाली बाधाओं का भी उल्लेख किया है।
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Pages:6-8
How to cite this article:
मोहम्मद वसीम अहमद, रीशा अहमद, सफदर हुसैन, मोहम्मद साजिद, जकी अहमद सिद्दीकी "यूनानी चिकित्सा के आधारभूत सिधांत". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 9, Issue 3, 2024, Pages 6-8
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