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VOL. 9, ISSUE 2 (2024)
मछली खेती की अनोखी तकनीक- एक्वापोनिक्स
Authors
धिरज अंगदराव शिंदे, चंद्रकांत दाते
Abstract
वर्तमान स्थिथीयो में खेती में पाणी कि कमी चालते भयंकर परीस्थितीया पैदा हुई हें। एक्वापोनिक्स तकनीक में मछली और सब्जियों की इंटीग्रेटेड तरीके से खेती की जाती है. खेती के लिए खाद की व्यवस्था मछलियों के वेस्ट से हो जाती है. भारत कृषि प्रधान देश है। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है ‘कृषि’। जब से दुनिया में सभ्यताओं का प्रारंभ हुआ तभी से खेती की जा रही है। खेती करने के लिए मिट्टी, धूप, पानी और खाद की जरूरत पड़ती है। ये एक ऐसी प्रक्रिया है,जिसमें जमीन में पौधा या बीज बो दो,तो कुछ महीनों में वो लहलहाती फसल और सालों में बड़ा पेड़ बन जाता है,लेकिन अब सब्जियां मिट्टी में ही नहीं बल्कि ‘पानी’में भी उग सकती हैं,वो भी मछलियों वाले पानी में। खेती की इस पद्धति को ‘एक्वापोनिक्स’कहते हैं। पानी से उगने वाली इन सब्जियों में मिट्टी में उगने वाली सब्जियों के मुकाबले अधिक पोषक तत्व होते हैं और पानी भी कम लगता है। जो जल संरक्षण की दृष्टि से लाभदायक है। इस तकनीक से ८०-९० प्रतिषद पानि बाचाया ज्यासकता है।
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Pages:15-16
How to cite this article:
धिरज अंगदराव शिंदे, चंद्रकांत दाते "मछली खेती की अनोखी तकनीक- एक्वापोनिक्स". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 9, Issue 2, 2024, Pages 15-16
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