ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 2 (2023)
राजेन्द्र यादव के उपन्यासों में नारी समस्याएँ
Authors
अनुपम कुमारी
Abstract
उपन्यासकार राजेंद्र यादव नारी के समान अधिकारों की मांग करते हुए मध्ययुगीन संस्कारों से परिपालित पुरुषाधिन्य समाज में नारी की स्थिति को सुधारने के पक्ष में कई प्रगतिशील एवं क्रांतिकारी विचार व्यक्त करते हैं वे अपनी कृतियों में नारी की स्थिति पर पाठकों की सहानुभूति को खींचने आर्थिक एवं सामाजिक पिछड़ेपन की वजह से नारी की असहाय स्थिति का यथार्थ वर्णन करते हैं। इतना ही नहीं नारी उनके समकालीन कथाकारो की तुलना में राजेन्द्र यादव की नारी -नियति अधिक परिष्कृत एवं मानवीय मूल्य के आधार पर समाज के गहरे सरोकारों से जुड़ी हुई प्रतीत होती है। क्योंकि कथाकार के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनके मानवीय मूल्यों को संपोषित करने की पक्ष धरता है इसी कारण उनकी कृतियों में नारी जीवन के कई सबल एवं सकारात्मक पक्षों का अंकन हुआ है।
कथाकार राजेंद्र यादव ने कथा के सहारे नारी विषयक स्थितियों के संबंध में जो विचार व्यक्त किये हैं। उनका सीधा संबंध समाज से हैं। नारी शिक्षा, दहेज प्रथा, अनमेल विवाह,पति व्रत धर्म, मर्यादा पालन तथा समान अधिकारों की मांग आदि स्थितियों का राजेंद्र जी ने अपने साहित्य में विस्तृत वर्णन किया हैं। उनके उपन्यासों में नारी की विभिन्न स्थितियाँ इस रूप में मुखरित हुई है,चाहे वे स्थितियाँ पारिवारिक, सामाजिक, राजनीति, नैतिक या अन्य कोई हों इन्होंने मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कथानक का चयन कर नारी संबंधी स्थितियों को अपने पात्रों के माध्यम से व्यक्त किया है। राजेंद्र यादव की विशेषता रही है कि वे जिन स्थितियों का निरूपण करते हैं,।गहराई से करते हैं,उसके सभी पक्षों पर विविध प्रकार से प्रकाश डालते हैं तथा साथ ही उनका समाधान का भी प्रयास किए हैं। उन्होंने समाज में नारी की बिगड़ती दशा को देखकर उसे अपने उपन्यासों का विषय बनाया और उनकी स्थितियों का विस्तृत धरातल पर चित्रित किया है।
Download
Pages:191-193
How to cite this article:
अनुपम कुमारी "राजेन्द्र यादव के उपन्यासों में नारी समस्याएँ". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 8, Issue 2, 2023, Pages 191-193
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.
