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VOL. 8, ISSUE 2 (2023)
ब्रिटिश काल में कृषि का वाणिज्यीकरणः एक आलोचनात्मक अध्ययन
Authors
रविना
Abstract
ब्रिटिश कृषि नीति का एक महत्वपूर्ण अंग भारतीय कृषि का वाणिज्यीकरण था। कृषि के वाणिज्यीकरण का अर्थ- इस प्रकार के कृषि उत्पादन की शुरूआत करना है जिसमें कृषि उत्पादों का प्रयोग व्यापारिक मुनाफे के लिए किया जा सके। प्राक् ब्रिटिश भारत में उत्पादन उन वस्तुओं का होता था जो मानव के लिए आवश्यक थी तथा जिनका प्रयोग विनिमय के लिए होता था बाज़ार के लिए नहीं, लेकिन अब किसान केवल उस वस्तुओं को उगाने लगा जिनका देशी और विदेशी बाज़ारों के दृष्टिकोण से अधिक मूल्य था। इस तरह कृषि के स्वरूप में मूलभूत परिवर्तन हुआ। भारत मुख्यतः कृषि पर आधारित देश रहा। भारत की अर्थव्यवस्था ग्रामीण समुदायों पर निर्भर थी जो प्रायः आत्मनिर्भर थे। जब अंग्रेज भारत आए तो मुख्यतः कृषि पर निर्भरता थी तथा कृषि तथा उद्योग में एक संतुलन बना हुआ था। परंतु अंग्रेजों ने अपना व्यापार-वाणिज्य के हितों के लिए भारत के तैयार माल के निर्यात की उपेक्षा की। अतः तैयार माल करने वालों का बोझ भी कृषि पर आ पड़ा। भारत के हस्तकला उद्योग नष्ट हो गए तथा भारत कच्चे माल के निर्यात के लिए मजबूर हुआ।
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Pages:185-186
How to cite this article:
रविना "ब्रिटिश काल में कृषि का वाणिज्यीकरणः एक आलोचनात्मक अध्ययन". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 8, Issue 2, 2023, Pages 185-186
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