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VOL. 7, ISSUE 2 (2022)
मिथिला मे पंजी व्यवस्थाः अभिलेखीय वंश परम्परा
Authors
कुमार संजय झा
Abstract
मध्यकालीन मिथिला की सामाजिक संरचना सामन्ती व्यवस्था पर आधारित थी1 जिसमें स्थानीयता, जाति, धर्म एवं वर्ण महत्वपूर्ण तत्व होते थे। ऐसी स्थिति में जाति प्रथा, खासकर जाति एवं उपजातियों के बीच रक्त की शुद्धता का समाज में बहुत ही ध्यान रखा जाता था। रक्त शुद्धता के लिए माता एवं पिता की पारिवारिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि को भी महत्व दिया जाता था और इसी से समाज में ‘कुलीन’ प्रथा का विकास हुआ। रक्त शुद्धता के लिए अनिवार्य तत्वों में खास क्षेत्र की बेटी से शादी करना और मातृ पक्ष में कम से कम पांच पीढ़ियों तक और पितृ पक्ष में कम से कम छह पीढ़ियों तक शादी की मनाही की शर्त्त रखी गई। शादी की इन शर्त्तों को पूरा करने के लिए सम्पूर्ण समाज के ‘पंजी’ का संधारण आवश्यक था।
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Pages:31-35
How to cite this article:
कुमार संजय झा "मिथिला मे पंजी व्यवस्थाः अभिलेखीय वंश परम्परा". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 7, Issue 2, 2022, Pages 31-35
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