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VOL. 7, ISSUE 1 (2022)
सांस्कृतिक पर्यटन में राजस्थान की लोक कला के प्रचार और संरक्षण पर डिजिटल मीडिया का प्रभाव
Authors
डॉ. जयश्री चुण्डावत, विजेन्द्र पाल सिंह झाला
Abstract
राजस्थान, जीवंत संस्कृति और समृद्ध धरोहर का प्रतीक, परंतु अपने सांस्कृतिक तारीके में गहरे रूप से निहित पारंपरिक कला के रूप में उभरता है। राजस्थानी मिनीचर पेंटिंग के शानदार रंग से लेकर घूमर नृत्य के लहराते ताल तक, राजस्थान की लोक कलाओं का हर पहलू उसके लोगों के आदर्शों और समय के गुज़रने का आत्मविष्वास को प्रतिबिंबित करता है। फिर भी, आधुनिकीकरण और वैष्वीकरण की तेजी से प्रगति के बीच, राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के ये मूल्यवान खजाने एक अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। इन पारंपरिक कलाओं का संरक्षण और प्रचार न केवल भूतकाल की संरक्षण के बारे में है, बल्कि उन जनसमुदायों में व्यक्ति और गर्व की भावना को भी बढ़ावा देने के बारे में है, जिन्होंने इन्हें शताब्दियों से पोषण किया है। इस परिपेक्ष्य में, राजस्थान की लोक कला के डिजिटल मीडिया पर प्रभाव का अध्ययन और सांस्कृतिक पर्यटन में संरक्षण का आवश्यकता बढ़ती जा रही है।
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Pages:56-63
How to cite this article:
डॉ. जयश्री चुण्डावत, विजेन्द्र पाल सिंह झाला "सांस्कृतिक पर्यटन में राजस्थान की लोक कला के प्रचार और संरक्षण पर डिजिटल मीडिया का प्रभाव". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 7, Issue 1, 2022, Pages 56-63
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