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VOL. 6, ISSUE 4 (2021)
समर्थ नारी की संघर्ष गाथाः अनारो
Authors
सुनीता मिश्रा
Abstract
कहने को आज नारी अधिकारों से सम्पन्न है। उसे संवैधानिक, सामाजिक अधिकार मिल चुके हैं। नारी को मिलनेवाले इन अधिकारों के लिए इतिहास गवाह है कि भारत में नारी को जो अधिकार मिले हैं वह ना तो किसी विद्रोह का परिणाम है और ना ही भावुकता या स्त्री के प्रति किसी प्रकार की संवेदना का परिणाम हैं। यह अधिकार भारतीय नारी ने अपनी योग्यता एवं कार्य कुशलता से प्राप्त किये हैं। किंतु क्या वास्तव में इन अधिकारों से नारी को गर्व से जीने का सम्मान मिला है?क्या उसपर अत्याचार नहीं हो रहा है? यह सबसे बड़ा प्रश्न आज भी बना हुआ है। फलस्वरूप समकालीन हिंदी साहित्य में नारी चेतना का स्वर प्रखर हुआ। साहित्य के क्षेत्र में महिला कथाकारों ने नारी जीवन से जुड़े अनेक घटको, बिंदुओं को केंद्र में रखकर अपने कथा साहित्य का सृजन किया है। जिन महिला उपन्यासकारो ने नारी जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपने उपन्यासों में उजागर किया है उनमें मंजुल भगत का नाम शीर्षस्थ है और उनका उपन्यास ष्अनारोष् एक विशिष्ट पहचान रखता है ।
महानगरी झुग्गी-झोपड़ी में रहकर, कोठियों में खटने वाली अनारो की चीख किसी एक अनारो की नहीं बल्कि उसमें उस प्रत्येक स्त्री की त्रासदी छुपी है जो आर्थिक-अभाव, सामाजिक रूढ़ियों और पुरुष अत्याचार के पहाड़ ढोते हुए भी सम्मान सहित जीने का संघर्ष करती है, फिर चाहे वो निम्नवर्ग की अशिक्षित अनारो हो या फिर मध्यम वर्ग की शिक्षित टीचर मालकिन हो अथवा उच्चवर्ग की सम्पन्न मोटी मालकिन, सभी पुरुष प्रधान समाज के अत्याचार से प्रताड़ित हैं, किंतु सम्मान से जीवन-यापन करने का अथक प्रयास कर रही हैं ।
अनारो के गैर जिम्मेदार, शराबी, अय्यासी पति नंदलाल ने उसे सौत, गरीबी और बच्चे यह सब कुछ दिया है पर उसे सम्मान व प्रेमभरा साथ नहीं दिया। फिर भी वह उसकी ब्याहता है और पत्नी होने के नाते उस पर गुमान करती है और चाहती है कि हर कारज-त्यौहार में उसका पति बस उसके बराबर खड़ा रहे। पति की लापरवाही पर नाराज न होते हुये जब भी वह लौटकर आता है, तब अनारो आदर्श पत्नी बनकर उसका स्वागत करती है। नंदलाल शराब पीकर अनारों की पिटाई करता है। किसी काम में हाथ नहीं बटाता, यहाँ तक कि कर्ज व्यापार में भी वह पत्नी का साथ नहीं देता, तब भी अनारों बस इतना चाहती है कि पति की दृष्टि में उसका मान बना रहें। 
दरअसल अनारो दुख और साहस की ऐसी मूरत है जिसमें उसके जैसी स्त्री की सारी भयावह सच्चाई पूंजीभूत हो उठी है। वह एक साधारण-सी लगनेवाली स्त्री की जिजीविषा तथा एक औरत के संघर्ष की कहानी है । ऐसी स्त्री जो स्वाभिमान से जीना चाहती है भले ही उसे जीवन में कितनी ही चुनौतियों का सामना क्यों ना करना पड़े। वह झुकना नहीं जानती पुत्री के विवाह का खर्च अनारो अकेली संभाल लेती है, काफी कर्जा लेती है और वह कर्ज चुकाते-चुकाते एकदम टूट जाती है, बीमार हो जाती है, तब भी वह अपने सारे रिश्तेदारों तथा मुहल्ले के लोगों को बुलाकर दावत देती है। कर्ज के कारण वह जिन्दगी भर पिसती रहती है।पर अपनी बेटी की शादी किसी विवाह संस्था के द्वारा करना अनारो को बिल्कुल स्वीकार नहीं है। उसका अपनी श्रमशक्ति पर विश्वास है। वह कहती है रू-”गंजी अनारो की बेटी कोई अनाथ नहीं है, कोई कानी लुली नही है, चौबारे की ईट नहीं, तो नाले का पत्थर भी नही है, अनारो की बेटी है।ष् 1 (अनारो) उसका मानना है कि अपनी बिरादरी में उसका नाम न खराब हो,वह बिरादरी में झुकना नहीं चाहती है। वह चाहती है कि समाज में उसका मान-सम्मान बना रहे। 
संक्षेप में इस उपन्यास के माध्यम से लेखिका ने निम्न वर्ग की भयावह सच्चाईयों को उघाड़ने का प्रयास किया है। निम्नवर्ग की नारी का यह संघर्षपूर्ण जीवन मात्र अनारो का ही नहीं बल्कि इसमें हर उस नारी की त्रासदी छुपी है जो समाज में सम्मानपूर्ण जीने का संघर्ष करती है। यह अनारो जैसी कई स्त्रियों की कहानी है जिनके लिए सामान्य जीवन जीना भी किसी जंग लड़ने से कम नहीं । सामाजिक रूढ़ियों से ग्रस्त होने के कारण ये नारियाँ बिरादरी के रीति-रिवाज संभालते-संभालते कर्ज में डूब जाती है। ऐसे त्रस्त जीवन से वह भले ही बाहर से कठोर दिखाई दे, किन्तु हृदय से वे उतनी ही कोमल तथा संवेदनशील है। पति द्वारा दुर्व्यवहार, सामाजिक, आर्थिक शोषण, संतान की भूख तथा निजी जरूरतों, आवश्यकताओं की पूर्ति किसी तरह कर भयानक तनाव का सामना ये नारियाँ करती है। 
प्रस्तुत उपन्यास का नारी पात्र अनारो भारतीय समाज की नारी जाति की दयनीय स्थिति व समस्या का परिचय देती है तथा उसपर हो रहे अन्यायों का प्रतिबिंब है । साथ ही इस उपन्यास में दिल्ली जैसे महानगर में झुग्गी झोपड़ी में रहनेवालों के जीवन का चित्रण भी किया है।
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Pages:29-32
How to cite this article:
सुनीता मिश्रा "समर्थ नारी की संघर्ष गाथाः अनारो". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 6, Issue 4, 2021, Pages 29-32
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