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VOL. 5, ISSUE 3 (2020)
धार्मिक तथा सामाजिक सुधार आन्दोलन में राजाराम मोहन राय की भूमिका
Authors
महेश कुमार
Abstract
महान विचारक राजा राम मोहन राय ने समाज को सुधारने के लिये अपना पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया । उन्होने समाज की तमाम कुरीतियों को खत्म करने के लिये उनका खुल कर विरोध किया था । लेकिन महिलाओं के जीवन को बदलने के लिये उन्होने जो कार्य किये उसके लिये सारा देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा । उन्होने महिलाओं को जहां कुरीतियों के मकड़जाल से निकालने में अहम योगदान दिया था वहीं, महिलाओं की स्वतंत्रता के भी पक्षधर थे। सैकड़ों वर्ष पहले बाल विवाह हो या फिर सति प्रथा ये समाज के वो अंग बन गए थे जो कि सिर्फ मनाव नींव को खोखला करने का काम करने में जुटे हुए थे। इन प्रथाओं का सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं ही हुई करती थी। इनके खिलाफ उस समय बोलना तो दूर की बात सोचना भी पाप माना जाता था। ऐसी रुढ़िवादी सोच को तोड़ने और समाज को फिर से बनाने का काम महान समाज सुधारक राजा राममोहन रॉय ने किया था। जिन्होंने भारतीय समाज में फैली ऐसी बुराइयों का जमकर विरोध किया। राजाराम मोहन राय ने सती प्रथा के विरोध के साथ-साथ विधवा विवाह के पक्ष में भी अपनी आवाज बुलंद की थी । राम मोहन ने ये कभी भी नहीं सोचा था कि जिस सती प्रथा के विरोध में वो लड़ाई लड़ रहे हैं और जिसे समाज से खत्म करना चाहते है, उस कुरीति की उनकी अपनी भाभी ही शिकार हो जाएंगी।
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Pages:09-12
How to cite this article:
महेश कुमार "धार्मिक तथा सामाजिक सुधार आन्दोलन में राजाराम मोहन राय की भूमिका". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 5, Issue 3, 2020, Pages 09-12
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