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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
मीरा की साधना पर अभिव्यक्ति
Authors
अनुपम शर्मा, डाॅ0 तबस्सुम खान
Abstract
हिंदी के वास्तविक और सशक्त स्त्री काव्य का आरंभ मीराबाई की कविता से होता है। उनकी कविता में स्त्री की आत्मा की ऐसी आवाज सुनाई पड़ती है जो पराधीनता के बोध से बेचैन और स्वाधीनता की आकांक्षा से प्रेरित स्त्री की आवाज है। जिसे आजकल स्त्री चेतना कहा जाता है उसकी सशक्त अभिव्यक्ति पहली बार हिंदी में मीरा के काव्य में मिलती है। मीरा का समय, उस समय के समाज, उसकी सामाजिक सांस्कृतिक बनावट और मीरा के परिवार को ध्यान में रखिए तो उनके जीवन-संघर्ष और आत्माभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के महत्व का वास्तविक बोध होगा।
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Pages:1341-1343
How to cite this article:
अनुपम शर्मा, डाॅ0 तबस्सुम खान "मीरा की साधना पर अभिव्यक्ति". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 1341-1343
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