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VOL. 1, ISSUE 3 (2016)
ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध
Authors
डाॅं0 राजकुमार
Abstract
जीवात्मा सृष्टि के आरम्भकाल से ही ज्ञान के अभाव में जन्म, जरा औरा मृत्यु के भय से दुःखों से ग्रसित होकर चैरासी लाख यौनियों में भटकता चला आ रहा है। इस जन्म, जरा और मरण तथा अवागमन के चक्र से सदा-सदा के लिय छुटकारा पाने का नाम ही मोक्ष है। यह केवल तत्त्व ज्ञान से ही संभव है। सृष्टि के वास्तविक सत्य ब्रह्म और उसकी शक्ति माया अथवा प्रकृति को जानना ही ज्ञान है। इसकी प्राप्ति के लिये वैराग्य का होना परम आवश्यक है। मनुष्य के अन्दर सांसारिक विषय वासनाओं व इच्छाओं का अभाव (विरक्ति) ही वैराग्य है। अतः हम निष्कर्ष के रूप में कह सकते हैं कि ज्ञान, वैराग्य ओर मोक्ष ये तीनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। इस शोध पत्र से विज्ञजनों को ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध विषयक ज्ञान प्राप्त होगा।
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Pages:04-05
How to cite this article:
डाॅं0 राजकुमार "ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध". National Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 1, Issue 3, 2016, Pages 04-05
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